खराब डाइजेशन के पीछे हो सकती हैं ये वजहें, जानें कैसे पाएं इससे छुटकारा


खराब डाइजेशन के पीछे हो सकती हैं ये वजहें, जानें कैसे पाएं इससे छुटकारा

देश में खानपान से जुड़ी कुछ समस्याएं गंभीर रूप लेती जा रही है। ऐसे में बदहजमी एसिडिटी गैस से ग्रस्त लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। तो पाचन तंत्र को कैसे बनाएं मजबूत जानें यहां

डाइजेशन बिगड़ने से होने वाली न सिर्फ बुजुर्गों, बल्कि युवा वर्ग, बच्चों तथा प्रौढ़ वर्ग को भी अपनी चपेट में ले रही हैं। प्राय: ये लक्षण कमजोर पाचन शक्ति से संबंधित अथवा किसी रोग जैसे लिवर, गैस्ट्रो ,डायबिटीज आदि के परिणामस्वरूप परिलक्षित होते हैं। इसके अलावा मानसिक पक्ष को देखा जाए तो तनाव भी हाजमे को खराब करने की खास वजह है फिर चाहे वह तनाव काम से जुड़ा हो या किसी कॉम्पिटिशन से।

अध्ययन का निष्कर्ष

आयुर्वेद एवं मनोवैज्ञानिकों ने मानसिक रोगों के कई आयामों पर जो अलग-अलग अध्ययन किए हैं, उनके अनुसार युवा वर्ग में बढ़ता स्ट्रेस व एंग्जायटी पाचन से संबंधित दिक्कतों की सबसे बड़ी वजह है। शरीर में बनने वाले टॉक्सिन और फ्रीरेडिकल्स भी रोग का कारण बनते हैं। सही समय पर भोजन न करना, लेट नाइट शिफ्ट में कार्य करना और जंक फूड्स, शराब, सिगरेट, पान मसाला गुटका और कैफीन आदि लेने वाले लोगों को अक्सर पाचन से संबंधित गैस, एसिडिटी और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं रहती हैं। अच्छी सेहत के लिए डाइजेशन का सही रहना बहुत जरूरी है।

व्यायाम का अभाव

आजकल बच्चे भी गैस, उलझन, पढ़ाई में एकाग्रता में कमी आदि शिकायत करने लगे हैं। इसका भी कारण उनके टिफिन में फास्ट फूड और जंक फूड का रहना है, जिसे वे बड़े चाव से खाते हैं। आउटडोर गेम्स और व्यायाम के अभाव के कारण मोबाइल सोशल मीडिया तथा टीवी पर गेम्स खेलने के कारण बच्चों की पाचन शक्ति पर दुष्प्रभाव पड़ता है। अव्यवस्थित जीवन शैली और स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति उपेक्षा के कारण आधी आबादी जिसमें महिलाओं का एक बड़ा वर्ग इससे जूझ रहा है।

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आयुर्वेद के अनुसार बताए गए आहार-विहार तथा कुछ प्रमुख औषधियां साथ ही एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीज़ें अच्छा ऑप्शन साबित होते हैं।

पेस्टिसाइड्स तथा केमिकल्स के अधिक उपयोग के कारण अनाज के पोषक तत्वों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इसलिए आहार में छिलके वाली दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां, मैदा की अपेक्षा मिश्रित अनाज तथा चोकर वाले आटे की रोटी, पेय पदार्थ कोल्ड ड्रिंक्स की अपेक्षा दही,छाछ, सूप, भोजन से पूर्व सलाद का सेवन करना चाहिए।

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रोजाना दिन कम से कम एक रेशेदार मौसमी फल का सेवन आदि को वरीयता देनी चाहिए। प्रात: काल गुनगुने पानी का सेवन पेट को स्वस्थ रखता है। नाश्ता स्वस्थ जीवन शैली का एक अभिन्न अंग है ब्रेकफास्ट न करना रोग का कारण बनता है।

भोजन से संबंधित सुझाव

भूख लगे बगैर भोजन न करें। छोटे-छोटे समय-अंतराल पर भोजन लें। अधिक समय फ्रिज में रखे भोजन को तुरंत गर्म करके न खाएं। गरिष्ठ तले भुने पदार्थ, अधिक चीनी युक्त, कोल्ड ड्रिंक, कैफीन तथा शराब से परहेज करें।

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तनाव को दूर करने के लिए पर्याप्त मात्रा में निद्रा, प्राणायाम, योगासन तथा मेडिटेशन करें। सकारात्मक विचार रखने से परोक्ष रूप से पाचन शक्ति अच्छी रहती है और गैस, खट्टी डकार, एसिडिटी, बदहजमी जैसे लक्षणों से राहत मिलती है। कुछ आयुर्वेदिक औषधियां इस प्रकार के रोगियों को राहत प्रदान करती हैं। ये दवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करती हैं लेकिन किसी विशेषज्ञ के परामर्श द्वारा ही दवाएं लेनी चाहिए। 

डॉ.अर्पिता सी राज, एम.डी.(आयुर्वेद)

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